जीवन दास दो सालो से बिस्तर पर लड़ रहे है ,जीवन की लड़ाई


फिंगेश्वर 

मदद के लिए विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लेकिन फरियाद अनसुनी

जीवन दास ने लगाई मदद की गुहार


जिंदगी एक संघर्ष है , इंसान की जिंदगी चुनौतियों से भरा होता है। किस मोड़ पर कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा  सकता। जब इंसान शारीरिक रूप से स्वस्थ होता है तो अपने मेहनत के बलबूते सब कुछ हासिल कर सकता है। लेकिन यही शरीर अस्वस्थ हो जाए तो इंसान का जीवन नर्क बन जाता है।
आज आपको एक ऐसे युवा के बारे में बताने जा रहे हैं ,जो कुछ साल पहले कारगुजारी कर हंसी खुशी जिंदगी जी रहे थे। लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी को तबाह कर उसे जिंदगी और मौत की दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया।

मामला है गरियाबंद जिले के आदिवासी ब्लॉक मुख्यालय छुरा से 15 किलोमीटर दूर बोईरगांव का जहां जीवन दास मानिकपुरी 25 वर्ष शारीरिक अस्वस्थता के चलते 2 साल से बिस्तर में पड़े जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे हैं ।मदद की आस लिए बैठा जीवन दास व उनका परिवार तिल - तिल मरकर  जिंदगी जीने मजबूर है।
घटना 17 फरवरी 2019 की है जब जीवन दास छुरा सेम्हरा से मोटरसाइकिल से अपने घर शाम को वापस आ रहा था तभी अज्ञात चार पहिया वाहन ने उसे ठोकर मार दी।  जिससे जीवन दास की रीढ़ की हड्डी फैक्चर हो गया और शरीर के अनेक हिस्सों में गंभीर चोट आई थी। उस दरमियान  रायपुर की राजधानी हॉस्पिटल में उनका इलाज हुआ। जीवन दास इस घटना में मौत के काल से तो बच गया। लेकिन हादसे में लगी गंभीर चोट की वजह से उनका सीने से लेकर पैर तक का हिस्सा पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया। जिसके कारण जीवनदास 2 सालों से बिस्तर में पड़े अपने जीवन से जूझ रहे हैं। आज भी जीवन दास को उम्मीद है कि उसे कन्ही से इलाज के लिए मदद मिलेगा और ठीक हो जाएगा।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे जीवन दास के माता पिता ने बताया कि इलाज के लिए सब जमा पूंजी, गहने सब खत्म हो गया। लाखों रुपए खर्च हो गए लेकिन उनका बेटा अभी तक ठीक नहीं हो पाया।

  जीवन दास के बारे में जानकारी बताते उनके माता पिता का दर्द आंसू बनकर छलक पड़ा। उनके मां-बाप अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए और बिलख- बिलख कर रो पड़े। आखिर एक मां बाप अपने बेटे की पीड़ा को कैसे देख सकता है।
जीवन दास की मां पार्वती ने बताया कि इलाज में बहुत सारे पैसे खर्च हो गए उनके बेटे के इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। साहूकारों से कर्ज लेकर किसी तरह दवा पानी व खाने का इंतजाम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई वे स्वयं अपने बेटे की इलाज के लिए मदद की गुहार लगाने विधायक  व मुख्यमंत्री निवास गई लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया इलाज करवाना तो दूर आवेदन को एक बार देखना भी उचित नहीं समझा।
बता दें कि पीड़ित चार भाई बहनों में से एक जीवनदास 12वीं तक पढ़ा लिखा है और घटना से पहले राजमिस्त्री का काम करता था । जीवन दास की सगाई भी हो गई थी लेकिन उस हादसे ने उनकी दूल्हा बनने की खुशी भी छीन ली।

गौरतलब है कि शासन द्वारा ऐसे लोगों के लिए अनेक प्रकार की योजना संचालित की है विभाग द्वारा शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के लिए ट्रायसिकल व अनेक प्रकार की सामग्री वितरित किया जाता है लेकिन जीवन दास को इस योजना का लाभ आवेदन देने के बावजूद भी नहीं मिला। किसी तरह 2 जून की रोटी की जुगत करने वाले गरीब मां बाप ने अपने बेटे को पीड़ा को देख किसी तरह उनके लिए ट्राईसाईकिल अपने स्वयं के पैसे से खरीद लिया।
तकलीफ क्या होता है ,इसको जीवन दास व उनके परिवार के आलावा कोई दूसरा कोई नहीं समझ सकता,मदद की आस लिए जीवन दास को आज भी उम्मीद है ,उसे जीवन जीने की चाह है,इसी का परिणाम है कि इतनी भयंकर हादसा व पीड़ा के बावजूद भी उनके चेहरे में एक अलग सा मुस्कुराहट है।जीवन दास व उनके परिवार ने शासन प्राशासन व लोगो से मदद की अपील की है।
अब देखना ये होगा कि खबर के बाद सामाजिक कार्यकर्ता, व जनप्रतिनिधि क्या कुछ करते है या फिर हर बार की तरह अख़बारों में सुर्खियां बटोरने फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहेंगे।वहीं जिला उज्जवल दिव्यांग कल्याण संघ के अध्यक्ष जागेश्वर साहू 
ने अपने संघ के तरफ से पीड़ित को हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिलाया है।

पत्रकार जितेंद्र शर्मा

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