बासीन पत्थर खदान मैं अवैध खनन से माइनिंग विभाग को करोड़ों का चुना।

 

 फिंगेश्वार,               
        
     गरियाबंद जिले की बड़ी कार्यवाही 5 खदानों एवं पांच फैक्ट्रियों को किया सील बंद। 



गरियाबंद जिले के विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम पंचायत बांसी न बरभाठा क्षेत्र मैं बरसों से छत्तीसगढ़ सरकार एवं खनिज विभाग के द्वारा नियम कानूनों पर्यावरण स्वीकृति एवं संपूर्ण दस्तावेजों के साथ पत्थर की खदानों के उत्खनन हेतु ठेकेदारों को लीज पर दिया जाता है यहां पत्थर की खदानों के साथ-साथ उत्खनन से निकाले गए लाखों रुपए की पत्थर को टाइल्स बनाकर पूरे भारत के अनेक राज्यों में बेचा जाता है किंतु आज ठेकेदारों के द्वारा इस क्षेत्र में लीज की आड़ में अपने एरिया को छोड़कर अन्य भूखंडों में अवैध उत्खनन कर करोड़ों रुपए अवैध तरीके से कमाया जा रहा है और यह तभी हो पा रहा है जब खनिज विभाग इस भ्रष्टाचार और अवैध कार्य में अनदेखी कर मौन स्वीकृति के साथ बरसों से चुप बैठे हैं किंतु क्षेत्र के ग्रामीण जन जो कि इसी खदानों में मजदूरी लेबर का कार्य कर अपना जीवन यापन करते हैं वह आज भी अपनी दशा नहीं सुधार पाए हैं अब तो ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह वर्तमान में लगभग 1 वर्ष से फिंगेश्वर एरिया की सरगी नदी जो की खदान एरिया से होकर गुजरती है नदी के बीच में पत्थरों का खनन कर कच्चा माल फैक्ट्रियों में भेजकर वहां से उसे टाइल्स के रूप में तैयार कर अन्य  राज्यों में बेचा जाना और लाखों धन एकत्रित करना आम बात हो गई थी गांव के ग्रामीणों का गुस्सा तब फूट पड़ा 6 जून को ग्राम पंचायत बासीन बरभाठा क्षेत्र के ग्रामीणों ने अवैध उत्खनन को लेकर हल्ला बोला ऐसे तो वर्षों से बासीन  बरभाठा खदान क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि अवैध उत्खनन का शिकार हो चुकी है नदी नाला गोठान, कोई जगह सुरक्षित नहीं है, अगर प्रशासन के अधिकारी अपना कार्य इमानदारी से कर दी गई लीज और उस भूखंड का जांच करें तो स्पष्ट हो जाएगा ,इसी विषय पर नदी के बीच अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर दिन भर हंगामा किया  गरियाबंद जिले के विभागीय अधिकारी ने मामले को गंभीरता से देखते हुए मौके पर आकर आनन-फानन में अवैध खनन का मामला देख खदानों को  बंद कर संबंधित पांच फैक्ट्रियों को सील बंद किया जबकि हमेशा अवैध खनन की शिकायतें की जाती रही है किंतु खनिज विभाग द्वारा कभी भी गंभीर कार्रवाई नहीं की गई , परिस्थितियां बिगड़ते देख कारवाही दिखाकर ग्रामीणों का गुस्सा को शांत किया ,ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जब क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन और भ्रष्टाचार चल रहा है तो अधिकारी स्वयं आकर अपना दायित्व और कर्तव्य क्यों नहीं निभाते उन्हें किसका इंतजार रहता है इसी अवैध खनन को लेकर फैक्ट्री के मालिक ठाकुर राम ओगरे एवं गांव के ही युवा देवेंद्र साहू के बीच सील की गई फैक्ट्री के बाजू में फैक्ट्री मालिक द्वारा स्टाक रखे फरसी एवं एवं खाली स्थान पर मुरम डालने का कार्य करते देख देवेंद्र साहू ने रोक-टोक की साथ ही गांव के कुछ लोग भी इकट्ठे हो गए फैक्ट्री मालिक ने कहा कि यह सीलबंद एरिया में नहीं आता इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में गाली गलौज तनातनी धक्का-मुक्की मारपीट का मामला फिंगेश्वर थाना में पहुंचा जहां दोनों पक्षों ने अपराध दर्ज कराया है फैक्ट्री मालिक ने अपनी रिपोर्ट में जातिसूचक गाली देने को लेकर आक्रोश व्यक्त करते हुए रिपोर्ट दर्ज की मामला थाना पहुंचते ही  बासीन खदान क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि दोनों पक्ष राजनीति से प्रेरित एवं जनप्रतिनिधि होने के नाते मामला राजनीतिक रूप से पार्टी लेबल तक पहुंच चुका है एक और देवेंद्र साहू भूतपूर्व विधायक भाजपा के पुनीत राम साहू का नाती है वहीं दूसरी ओर 50 वर्षों से खदान क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पैठ रखने वाले रामविशाल ओगरे के पुत्र जो कि कांग्रेस के पदाधिकारी भी है एवं फैक्ट्री मालिक हैं एक तरफ कांग्रेस के विधायक तक पहुंच लगाई जा रही है दूसरी तरफ बीजेपी के सांसद चुन्नीलाल जी तक मामला पहुंच चुका है वह मौके पर आकर मामले को समझ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच का निर्देश भी जारी कर चुके हैं। 



     बासीन ग्राम के सरपंच राजू सोनी स्वयं अपने संरक्षण में नदी के बीच अवैध उत्खनन कर किराए की फैक्ट्री मैं टाइल्स बनाकर बेखौफ बेचते हैं। 

       किए गए पंचनामा में पांच खदानों को सील करने का कार्य अधिकारियों ने किया एवं पांचों फैक्ट्रियों को सील बंद किया गया जिसमें मुख्य रुप से ठेकेदार के रूप में बासी न के सरपंच राजू सोनी ठेकेदार रानू लाल जैन ।

रेवा ओगरे विकास चतुर्वेदी सोहन साहू नरेंद्र मिश्रा सोहन प्रजापति के नाम शामिल हैं गत दिनों हुए मारपीट गाली-गलौज की घटना मुख्य रूप से अवैध खनन की देन है फैक्ट्री मालिक ने पेनाल्टी पटाकर सीलबंद फैक्ट्री को चालू करने के आदेश प्राप्त कर चुके हैं इस मामले में ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि नदी के बीच किए गए अवैध खनन के मुकाबले पेनाल्टी मात्र दिखावा है मूल रूप से खनिज विभाग विशेष रूप से सरक्षण देकर समय-समय पर शिकायतें होने पर दिखावे की कार्यवाही कर मौन बैठ जाते हैं यही कारण है कि लंबे समय से का बीज ठेकेदार पूरे क्षेत्र को अवैध उत्खनन का अड्डा बना चुके हैं और दिनों दिन मालामाल हो रहे हैं जबकि ग्रामीण मजदूर बदतर स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं ग्रामीणों की मांग के आधार पर क्षेत्र में हो रहे भ्रष्टाचार एवं अवैध खनन से हो रहे सरकार को प्रतिवर्ष लाखों करोड़ों के नुकसान को देखते हुए सख्त से सख्त कार्यवाही करनी चाहिए वरना आए दिन गुटबाजी एवं लड़ाई झगड़े होते रहेंगे

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